जमीन खरीदना हर परिवार के लिए एक बड़ा फैसला होता है। लेकिन पहले रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की अलग और लंबी प्रक्रिया लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाती थी। कई बार महीनों तक फाइलें अटकी रहती थीं और नए मालिक को अपने अधिकार साबित करने में दिक्कत होती थी। अब सरकार ने भूमि पंजीकरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 2026 के नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत रजिस्ट्री पूरी होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू होकर डिजिटल रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम अपडेट हो जाएगा।
नए नियमों के अनुसार अब रजिस्ट्री और नामांतरण को अलग-अलग प्रक्रिया नहीं माना जाएगा। पहले खरीदार को तहसील या राजस्व विभाग में अलग से आवेदन देना पड़ता था। अब सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री के दौरान दर्ज की गई जानकारी सीधे डिजिटल भूमि रिकॉर्ड सिस्टम में ट्रांसफर हो जाएगी। खरीदार और विक्रेता का विवरण, खसरा नंबर, जमीन का क्षेत्रफल और स्थान जैसी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर तुरंत अपडेट की जाएगी। यदि दस्तावेज सही और जमीन विवाद रहित है, तो सिस्टम स्वतः नामांतरण स्वीकृत कर देगा।
इस डिजिटल व्यवस्था से सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों और किसानों को मिलेगा। अब प्रॉपर्टी खरीदने के बाद मालिकाना हक के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बैंक लोन लेने, जमीन बेचने या अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में आसानी होगी। बिचौलियों की भूमिका कम होने से अतिरिक्त खर्च भी घटेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद कम होने की संभावना है क्योंकि रिकॉर्ड तुरंत अपडेट होंगे और पारदर्शिता बढ़ेगी।
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नए नियमों में आधार आधारित सत्यापन, ई-स्टांप और डिजिटल सिग्नेचर जैसी व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं, ताकि फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके। आवेदन से लेकर प्रमाणपत्र डाउनलोड करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की जा सकती है। आवेदक अपनी फाइल की स्थिति डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से देख सकता है। सभी रिकॉर्ड सुरक्षित सर्वर पर संग्रहित रहेंगे, जिससे भविष्य में विवाद होने पर प्रमाण उपलब्ध रहेगा।
सरकार का उद्देश्य भूमि प्रशासन को सरल, पारदर्शी और तेज बनाना है। लंबे समय से चली आ रही दोहरी प्रक्रिया को खत्म कर डिजिटल सिस्टम से जोड़ना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और प्रॉपर्टी क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए तैयार किया गया है। भूमि पंजीकरण और नामांतरण के नियम अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकते हैं और समय-समय पर बदल सकते हैं। किसी भी निर्णय से पहले संबंधित राज्य की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय राजस्व विभाग से नवीनतम जानकारी अवश्य प्राप्त करें।



